आदिवासी समाज भारत की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, असम और देश के कई हिस्सों में सैकड़ों आदिवासी समुदाय रहते हैं, जिनकी अपनी भाषा, परंपरा और जीवन शैली है।

प्रकृति के साथ जीवन

जंगल, पहाड़, नदी और धरती आदिवासी जीवन का आधार हैं। सरहुल, करमा, सोहराय, माघे और बाहा जैसे त्योहार प्रकृति के प्रति आभार और सामूहिक जीवन का उत्सव हैं।

भाषाएँ

कुड़ुख, मुंडारी, संथाली, हो, खड़िया, गोंडी, भीली और कई अन्य भाषाएँ आदिवासी पहचान का गौरव हैं।

सामाजिक व्यवस्था

गोत्र/किली व्यवस्था, ग्राम सभा, पाहन-पुजार, मानकी-मुंडा और परहा जैसी पारंपरिक व्यवस्थाएँ समाज को एकजुट रखती हैं।