धरती आबा बिरसा मुंडा: जल, जंगल, ज़मीन के नायक

धरती आबा बिरसा मुंडा: जल, जंगल, ज़मीन के नायक

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को उलिहातू (वर्तमान खूंटी जिला, झारखंड) में हुआ था। उन्होंने अंग्रेज़ी शासन और ज़मींदारी शोषण के खिलाफ आदिवासी समाज को एकजुट किया।

उलगुलान

1899-1900 में उनके नेतृत्व में "उलगुलान" (महान विद्रोह) हुआ, जिसका नारा था — "अबुआ दिशुम, अबुआ राज" (हमारा देश, हमारा राज)। लोग उन्हें प्यार से "धरती आबा" (धरती पिता) कहते हैं।

विरासत

9 जून 1900 को रांची जेल में मात्र 25 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके संघर्ष का परिणाम छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (1908) के रूप में सामने आया। उनकी जयंती 15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस और जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई जाती है।